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Friday, May 4, 2018

Jaipur doppler radar dysfunctional when dust storm hit Rajasthan

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डोप्लर रडार आंधी , तूफान , बारिश का बेहतर आकलन लगाने में मदद करता है और इससे दो - तीन घंटों के भीतर मौसम अलर्ट जारी करने में भी सहायता मिलती है. 





राजस्थान में जब तूफान मचा रहा था तबाही, तब डॉप्लर रडार पड़ा हुआ था खराब

2 मई की रात को तेज गति से धूल भरे आंधी - तूफान ने राजस्थान के कुछ हिस्सों में तबाही मचाई थी. ( फोटो साभार - PTI)


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Jaipur Doppler Radar Dysfunctional When Dust Storm Hit UP And Raj

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  • देश में मौसम विभाग के 27 ड्रॉपलर राडार हैं। जयपुर और काराइकल के राडार काम नहीं कर रहे हैं
  • ड्रॉपलर के अलावा मौसम विभाग पूर्वानुमानों के लिए वेधशालाओं और सैटेलाइटों पर निर्भर रहता है

नई दिल्ली.राजस्थान और यूपी में जिस दिन धूलभरी आंधी आई थी, तब जयपुर स्थित मौसम विभाग के दफ्तर में ड्रॉपलर राडार काम नहीं कर रहा था। मौसम विभाग के एडिशनल डायरेक्टर जनरल देवेंद्र प्रधान ने कहा कि तकनीकी कारणों की वजह से राडार काम नहीं कर रहा था। ड्रॉपलर राडार मौसम के पूर्वानुमान लगाने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा होता है। बता दें कि 2 मई को यूपी-राजस्थान समेत देश के उत्तरी इलाकों में धूलभरी आंधी आई थी। इसकी वजह से 133 लोगों की जान गई।

10 दिन से खराब, सुधरने में अभी लगेंगे 2-3 दिन
- प्रधान ने बताया कि पिछले 10 दिनों से ये राडार खराब है। इंजीनियरों की टीम यहां आई है और इस समस्या को अगले 2-3 दिन में सुलझा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर जयपुर का राडार ठीक होता तो हम ज्यादा बेहतर स्थिति में होते।

जयपुर के अधिकारी बोले- चेतावनी जारी की गई थी
- जयपुर मौसम विभाग के एक्टिंग डायरेक्टर हिमांशु शर्मा ने कहा, "2 मई को ड्रॉपलर राडार में खराबी आ गई थी, इसका पता अगले दिन चल पाया। हालांकि, हमने राहत विभाग को धूल भरी आंधी को लेकर चेतावनी दी थी।"

क्यों अहम है ड्रॉपलर राडार?
- प्रधान ने बताया कि आपदा नियंत्रण के लिए ड्रॉपलर राडार एक अहम मशीन है।
- ड्रॉपलर के अलावा मौसम विभाग पूर्वानुमानों के लिए वेधशालाओं और सैटेलाइटों पर निर्भर रहता है। ड्रॉपलर राडार की मदद से आंधी, ओलावृष्टि और हवा की दिशा के बारे में बेहतर पूर्वानुमान मिलते हैं। ये 2-3 घंटों के लिए तात्कालिक अलर्ट जारी करने में भी मदद करता है।
- फिलहाल देश में मौसम विभाग के 27 ड्रॉपलर राडार हैं। जयपुर और काराइकल के राडार काम नहीं कर रहे हैं।

बदले हुए मौसम का 12 राज्यों पर असर पड़ा, 133 जानें गईं
- बुधवार रात यूपी-राजस्थान समेत देश के उत्तरी इलाकों में धूल भरी आंधी चली थी। इसके असर से गुरुवार को दक्षिणी राज्यों में जमकर बारिश हुई। मौसम के इस पलटे मिजाज का असर 12 राज्यों पर पड़ा। इसमें 133 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। 300 से ज्यादा घायल हो गए। हजारों मकान, सैकड़ों वाहन और फसलों को भारी नुकसान हुआ।

ये भी पढ़ें-
यूपी-राजस्थान समेत 12 राज्यों में 3 दिन तक तेज आंधी-तूफान की आशंका, मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट



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Why Dusty Storm turned Deadly in UP, Rajasthan?

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नई दिल्‍ली : तेज हवा के तूफान बनने का कारण क्‍या है? ठंडी हवा कैसे 150 किमी प्रति घंटे की तेज रफ्तार के तूफान में बदल गई और दीवार, घर, होर्डिंग गिराते-उड़ाते हुए 100 से ज्‍यादा जानें लील गई. इस तूफान ने यूपी और राजस्‍थान में सबसे ज्‍यादा तबाही मचाई है. शुक्रवार को मौसम विभाग ने फिर चेतावनी जारी कर लोगों को सतर्क किया है. उसका कहना है कि तूफान जम्‍मू-कश्‍मीर, हरियाणा, दिल्‍ली, उत्‍तराखंड, पंजाब, चंडीगढ़ और पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश में फिर तबाही मचा सकता है. वहीं हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, नगालैंड, मिजोरम, त्रिपुरा, ओडीशा और केरल में तेज हवाएं चलने आने की आशंका है. तूफान आने के साथ तेज बारिश भी होगी. कई जगहों पर ओले गिरने की भी आशंका है. मौसम विज्ञानियों ने तेज हवा के तूफान बनने का कारण तलाशने की कोशिश की है. आइए जानते हैं मौसम में इस बदलाव का कारण:


100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है हवा
मौसम विज्ञानियों की मानें तो ठंडी हवाओं का तूफान का रूप लेने के पीछे वजह 'डाउनबर्स्‍ट' है, यानि हवा चलने के दौरान डाउनवर्ड एयर मूवमेंट उसे तूफान में तब्‍दील कर देता है. इस दौरान 100 किमी प्रति घंटे या उससे अधिक की रफ्तार से हवा चलती है. जब डाउनवर्ड हवा जमीन से टकराती है तो वह बाहर की तरफ धक्‍का मारती है. किसानों को अकसर इससे संघर्ष करते देखा गया है. हवा का यह मूवमेंट 200 मील तक रहता है. हालांकि कुछ थोड़ी दूर में ही शांत हो जाती हैं. जो डाउनबर्स्‍ट ढाई मील से छोटे होते हैं उन्‍हें 'माइक्रोबर्स्‍ट' कहते हैं. इसमें हवा में मिट्टी का शामिल होना और बड़ी तबाही का कारण बनता है. ऐसा मंजर गर्म प्रदेशों में ज्‍यादा देखने को मिलता है, जहां का तापमान 40 डिग्री से ऊपर रहता है. इस दौरान विजिबिलटी शून्‍य हो जाती है. आंखों से दिखना बंद हो जाता है. जब यह हवा किसी दीवार या इमारत से टकराती है तो उसके गिरने से तबाही का मंजर और भयावह हो जाता है.


 



क्‍लाइमेट चेंज वजह तो नहीं?
नेशनल जियोग्राफिक में छपी खबर के मुताबिक विज्ञानी बताते हैं कि मौसम में इस बदलाव का कारण जलवायु परिवर्तन (Climate change) है. ग्‍लेशियर का पिघलना, तपती धरती, समुद्र का उफनाना, जंगलों का कटना और बादलों का फटना जलवायु परिवर्तन का मूल संकेत हैं यानि वातावरण के साथ खिलवाड़ के कारण ये विपदाएं आ रही हैं. दुनिया में चक्रवात या तूफान की संख्‍या लगातार बढ़ रही है. अमेरिका और तटवर्ती देश साल में कई बार तूफान का प्रकोप झेलते हैं. 


तूफान और बवंडर में फर्क
गर्मी के मौसम में छोटे-छोटे धूल के बवंडर दिखते हैं जो गोलाकार स्तम्भ बनाते हैं. यह कम क्षेत्रफल में तबाही मचाता है जबकि तूफान बड़े क्षेत्रफल में तबाही मचाता है. बवंडर तब बनता है जब हवा गर्म होकर जैसे ही ऊपर उठती है, आसपास की ठंडी हवा खाली जगह भर देती है और यह भी गर्म होकर और बड़ा बवंडर बन जाती है. इस दौरान भी 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलती है.




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Thursday, May 3, 2018

So This Is The Reason Of Terrible Storm - 75 की मौत: तो इस वजह से आया था भयानक तूफान, 2 दिन इन इलाकों में रहेगा असर

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स्काईमेट वेदर के मौसम विज्ञानी महेश पलावत ने बताया, सात राज्यों में आई भयानक आंधी के दो मुख्य कारण हैं। जम्मू एवं कश्मीर में बुधवार को आया नया पश्चिमी विक्षोभ और उत्तरी राजस्थान, हरियाणा एवं पंजाब में बना चक्रवाती हवा का क्षेत्र। यह पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान की ओर से आया है। 

वैज्ञानिक पलावत के मुताबिक चक्रवाती हवा के क्षेत्र से दो जगहों पर हरियाणा और उत्तरी राजस्थान में गरजने वाले बादल बन गए। वहीं चक्रवाती हवा के क्षेत्र वाले इन इलाकों से पूर्व की ओर बिहार तक निम्न दबाव की रेखा बन गई। हरियाणा में बने गरजने वाले बादल आगे बढ़े और पूर्वी हरियाणा से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक जबरदस्त आंधी-बारिश ले आए। 

वहीं उत्तरी राजस्थान के गरजने वाले बादल अलवर आदि शहरों से होते हुए आगरा समेत पूरे मध्य उत्तर प्रदेश में आंधी ले आए। 100 किलोमीटर की रफ्तार से हवा चली। पेड़ गिरे और भारी तबाही हुई। राजस्थान में तो 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने का दावा किया जा रहा है। 

दो दिन रहेगा असर
तीन और चार मई के दौरान भी यह दबाव का क्षेत्र बना रहेगा, लेकिन तेज आंधी-तूफान की संभावना कम है। हालांकि पूरे मई में प्री मानसून सीजन में रह-रहकर देश के अलग-अलग इलाकों में आंधी तूफान आते रहेंगे।  

मौसम विभाग का अनुमान हुआ फेल
मौसम विभाग ने एक से चार मई के बीच पूर्वोत्तर भारत में आंधी का अनुमान लगाया था। वहीं राजस्थान समेत उत्तर भारत में आंधी-तूफान का कोई अलर्ट जारी नहीं किया था। हालांकि निजी मौसम एजेंसी जैसे स्काईमेट ने उत्तर भारत में आंधी की आशंका जाहिर की थी। 

क्यों आती है आंधी
राजस्थान भूमध्य रेख के इर्दगिर्द है। इस क्षेत्र में वायु मंडलीय दबाव कम होता है। दबाव सीमा से अधिक पहुंचने पर ठंडी शुष्क हवा जमीन की ओर आती है। वहीं जमीन की हवा ऊपर की ओर उठती है। हवा की रफ्तार ज्यादा होने पर यह आंधी बन जाती है।

क्या होता है निम्न दबाव का क्षेत्र
जिस क्षेत्र में वायु का दबाव आसपास के क्षेत्र से कम हो जाता है, उसे निम्न दबाव का क्षेत्र कहते हैं। इससे बारिश होती है। 

पश्चिमी विक्षोभ
भूमध्यसागर से उठी तूफानी हवा को पश्चिमी विक्षोभ कहते हैं। इससे उत्तर पश्चिमी भारत में शीत ऋतु में बर्फबारी होती है। वहीं मानसून के इतर गर्मियों और सर्दियों में इससे तेज हवाएं चलती हैं।


स्काईमेट वेदर के मौसम विज्ञानी महेश पलावत ने बताया, सात राज्यों में आई भयानक आंधी के दो मुख्य कारण हैं। जम्मू एवं कश्मीर में बुधवार को आया नया पश्चिमी विक्षोभ और उत्तरी राजस्थान, हरियाणा एवं पंजाब में बना चक्रवाती हवा का क्षेत्र। यह पश्चिमी विक्षोभ पाकिस्तान की ओर से आया है। 


वैज्ञानिक पलावत के मुताबिक चक्रवाती हवा के क्षेत्र से दो जगहों पर हरियाणा और उत्तरी राजस्थान में गरजने वाले बादल बन गए। वहीं चक्रवाती हवा के क्षेत्र वाले इन इलाकों से पूर्व की ओर बिहार तक निम्न दबाव की रेखा बन गई। हरियाणा में बने गरजने वाले बादल आगे बढ़े और पूर्वी हरियाणा से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक जबरदस्त आंधी-बारिश ले आए। 

वहीं उत्तरी राजस्थान के गरजने वाले बादल अलवर आदि शहरों से होते हुए आगरा समेत पूरे मध्य उत्तर प्रदेश में आंधी ले आए। 100 किलोमीटर की रफ्तार से हवा चली। पेड़ गिरे और भारी तबाही हुई। राजस्थान में तो 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने का दावा किया जा रहा है। 

दो दिन रहेगा असर
तीन और चार मई के दौरान भी यह दबाव का क्षेत्र बना रहेगा, लेकिन तेज आंधी-तूफान की संभावना कम है। हालांकि पूरे मई में प्री मानसून सीजन में रह-रहकर देश के अलग-अलग इलाकों में आंधी तूफान आते रहेंगे।  

मौसम विभाग का अनुमान हुआ फेल
मौसम विभाग ने एक से चार मई के बीच पूर्वोत्तर भारत में आंधी का अनुमान लगाया था। वहीं राजस्थान समेत उत्तर भारत में आंधी-तूफान का कोई अलर्ट जारी नहीं किया था। हालांकि निजी मौसम एजेंसी जैसे स्काईमेट ने उत्तर भारत में आंधी की आशंका जाहिर की थी। 

क्यों आती है आंधी
राजस्थान भूमध्य रेख के इर्दगिर्द है। इस क्षेत्र में वायु मंडलीय दबाव कम होता है। दबाव सीमा से अधिक पहुंचने पर ठंडी शुष्क हवा जमीन की ओर आती है। वहीं जमीन की हवा ऊपर की ओर उठती है। हवा की रफ्तार ज्यादा होने पर यह आंधी बन जाती है।

क्या होता है निम्न दबाव का क्षेत्र
जिस क्षेत्र में वायु का दबाव आसपास के क्षेत्र से कम हो जाता है, उसे निम्न दबाव का क्षेत्र कहते हैं। इससे बारिश होती है। 

पश्चिमी विक्षोभ
भूमध्यसागर से उठी तूफानी हवा को पश्चिमी विक्षोभ कहते हैं। इससे उत्तर पश्चिमी भारत में शीत ऋतु में बर्फबारी होती है। वहीं मानसून के इतर गर्मियों और सर्दियों में इससे तेज हवाएं चलती हैं।




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Wednesday, May 2, 2018

Agra Thirty Six People Died Due To Storm - यूपीः 132 किमी की रफ्तार से आया तूफान, आगरा में अब तक 36 लोगों की हुई मौत

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न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा, Updated Thu, 03 May 2018 10:50 AM IST






आगरा में बुधवार की शाम एक बार फिर आए तूफान और बारिश ने भारी तबाही मचाई है। 132 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से आए तूफान ने इस बार 36 लोगों की जान ले ली। डीएम गौरव दयाल के मुताबिक गुरुवार सुबह दस बजे लोगों की मौत की संख्या 24 से 36 पहुंच गई है। वहीं करीब 90 मिनट तक आंधी, बारिश और ओलों की मार के कारण सैकड़ों पेड़ और होर्डिंग गिर पड़े। 





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