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नई दिल्लीः वीवीआईपी की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ ने गृह मंत्रालय से 1500 अतिरिक्त जवानों की मांग की है. इस मांग को स्वीकार करते हुए गृह मंत्रालय ने सीआईएसएफ के प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. गृह मंत्रालय से लिखित स्वीकृति मिलते ही सीआईएसएफ इन जवानों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर देगा. प्रारंभिक चरण में इन जवानों का प्रशिक्षण पूरा करने के बाद कुछ समय के लिए दूसरी यूनिट में तैनाती की जाएगी. जबकि इन यूनिट की क्विक रिएक्शन टीम के कमांडो को वीवीआईपी सिक्योरिटी का प्रशिक्षण देने के बाद उन्हें माननीयों की सुरक्षा में तैनात कर दिया जाएगा.
वीवीआईपी की सुरक्षा में तैनात हैं करीब 2500 कमांडो
सीआईएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार वीवीआईपी की सुरक्षा में वर्तमान समय में कुल 2500 कमांडो को तैनात किया गया है. जिसके 1200 कमांडो की तैनाती स्थाई तौर पर सीआईएसएफ की स्पेशल सिक्योरिटी विंग में की गई है. जबकि अतिरिक्त 1300 कमांडो को दूसरी यूनिट की सुरक्षा से निकालकर वीवीआईपी की सिक्योरिटी में लगाया गया है. सीआईएसएफ के अनुसार वर्तमान समय में वे कुल 73 वीवीआईपी को सुरक्षा मुहैया करा रहे हैं. जिसमें नौ जेड - प्लस, नौ - जेड, 33 - वाई और 22 - एक्स श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई है.
दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा के लिए भी मांगे गए पांच हजार से अधिक जवान
सीआईएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार गृह मंत्रालय को भेजे गए प्रस्ताव में कुल 6640 जवानों की मांग की गई है. जिसमें दिल्ली मेट्रो की सुरक्षा के लिए 5140 जवानों की मांग की गई है. वहीं वीवीआईपी सिक्योरिटी के लिए 1500 जवान मांग गए हैं. उल्लेखनीय है दिल्ली मेट्रो के फेज तीन के नए स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था देखने के लिए सीआईएसएफ की डीएमआरसी यूनिट को अतिरिक्त जवानों की आवश्यकता है. अभी यह आवश्यकता दूसरे यूनिट में तैनात जवानों को अस्थाई तौर पर मेट्रो भेजकर पूरी की जा रही है. गृह मंत्रालय की संस्तुति के बाद 5140 जवानों को मेट्रो में तैनात कर दिया जाएगा. जिसके बाद मेट्रो की सुरक्षा संभालने वाले कुल जवानों की संख्या करीब 12 हजार हो जाएगी.
हार्दिक पटेल की सुरक्षा वापस लेने की प्रक्रिया शुरू
सीआईएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार गृह मंत्रालय के निर्देश पर हार्दिक पटेल की सुरक्षा वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. उल्लेखनीय है कि गुजरात विधानसभा चुनावों के दौरान हार्दिक पटेल को गृह मंत्रालय के निर्देश पर वाई श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराई गई थी. गृह मंत्रालय ने हार्दिक को यह सुरक्षा खुफिया विभाग की रिपोर्ट के आधार पर दी थी. गृह मंत्रालय के निर्देशों का पालन करते हुए सीआईएसएफ के कमांडो को हार्दिक की सुरक्षा में लगाया गया था. वही बीते माह 26 अप्रैल को वीवीआईपी की सिक्यूरिटी रिब्यू के बाद गृह मंत्रालय ने हार्दिक की सुरक्षा वापस लेने का फैसला लिया. गृह मंत्रालय से निर्देश मिलने के बाद हार्दिक की सुरक्षा वापस लेने की प्रक्रिया सीआईएसएफ ने शुरू कर दी है.
संयुक्त राष्ट्र: भारत ने पाकिस्तान से संचालित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी की सूची में शामिल करने की उसकी कोशिशों में लगातार रोड़ा अटकाने के लिए चीन पर निशाना साधा और प्रतिबंध समितियों जैसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सहायक अंगों में ‘‘गुप्त वीटो’’ के इस्तेमाल की आलोचना की. संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि वह अध्यक्ष के इस सुझाव का स्वागत करते हैं कि इस बात का पता लगाया जाए कि कैसे वीटो परिषद के काम और उसकी प्रभावकारिता पर असर डालता है.
उन्होंने सुरक्षा परिषद की सदस्यता में वृद्धि और समान प्रतिनिधित्व के सवाल पर अंतर सरकारी वार्ता के अनौपचारिक पूर्ण सत्र की बैठक में यह बात कही. अकबरुद्दीन ने कहा कि जिन मौकों पर गुप्त वीटो का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिये, वहां उसका इस्तेमाल किये जाने से परिषद के काम और उसकी प्रभावशीलता पर असर पड़ रहा है. अकबरुद्दीन ने कहा, ‘‘इस संदर्भ में हम परिषद के सहायक अंगों में ‘गुप्त’ वीटो के इस्तेमाल पर प्रकाश डालना चाहेंगे. मुझे यह स्पष्ट करने दीजिए कि गुप्त वीटो क्या है. ’’ उन्होंने कहा कि सुरक्षा परिषद के एक दर्जन से अधिक सहायक अंग हैं जो हर साल अनेक फैसले सुनाते हैं.
प्रतिबंध समितियों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा उनमें से प्रत्येक वीटो का इस्तेमाल करते हैं लेकिन ‘हममें से किसी को भी इस बारे में जानकारी नहीं दी जाती है.’’ उन्होंने कहा कि ‘गुप्त’ वीटो का इस्तेमाल करने वाले परिषद के स्थायी सदस्यों को उनके कार्यों के लिए सार्वजनिक स्पष्टीकरण देने की जरुरत नहीं होती है.
उन्होंने कहा, ‘‘इस तरह के वीटो को न तो दर्ज किया जाता है और न ही सार्वजनिक किया जाता है. वास्तव में, गुप्त वीटो के इस्तेमाल से जो प्रस्ताव खारिज हो जाता है, उसे कभी सार्वजनिक नहीं किया जाता है, क्योंकि उसे ‘अवरूद्ध’ माना जाता है.’’ बहरहाल, अकबरुद्दीन ने किसी भी देश का नाम नहीं लिया लेकिन यह अच्छी तरह पता है कि जब भी पाकिस्तानी आतंकवादियों या आतंकवादी समूहों की बात आयी तो चीन ने अपनी वीटो शक्ति का इस्तेमाल किया.
उन्होंने कहा कि इस तरह के वीटो के इस्तेमाल को सार्वजनिक किया जाना और इसके इस्तेमाल के लिये स्पष्टीकरण दिये जाने को जरूरी बनाना सुरक्षा परिषद के कामकाज में पारदर्शिता और उसे प्रभावी बनाने की दिशा में पहला कदम होना चाहिये. उन्होंने कहा कि वीटो सेक्शन में गुप्त वीटो के इस्तेमाल समेत अन्य सुझावों पर विचार किया जा सकता है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो अधिकार प्राप्त स्थायी सदस्य चीन मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अल कायदा प्रतिबंध समिति के तहत आतंकवादी घोषित करने के भारत के प्रयासों में बार-बार रोड़ा अटकाता आ रहा है.
इनपुट भाषा से भी