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Friday, May 4, 2018

After Narendra Modi And Amit Shah Top Choice Of Karnataka Is Yogi Adityanath - मोदी और शाह के बाद कर्नाटक की टॉप च्वाइस योगी आदित्यनाथ

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बाद यदि भाजपा में प्रचार के लिए किसी की सबसे अधिक मांग है तो वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। योगी आदित्यनाथ भाजपा के लगातार स्टार प्रचारक बने हुए हैं और राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद से प्रचार के लिए उनकी मांग बराबर बनी है। तटीय कर्नाटक में भी आदित्यनाथ की काफी मांग है। वह हुबली, उडुपी समेत दक्षिण कन्नड. तथा उत्तरी कन्नड़ में राजनीति का समीकरण बदल सकते हैं।

भाजपा के कर्नाटक चुनाव प्रचार में व्यस्त केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि राज्य में वह न केवल जनसभा को संबोधित करेंगे, बल्कि रोड शो समेत अन्य प्रचार में भी शामिल होंगे। माना यह जा रहा है कि योगी चुनाव प्रचार के आखिरी दिन 10 मई तक राज्य में पार्टी के पक्ष में राजनीतिक समीकरण बनाने के लिए दर्जन भर से अधिक जन सभाओं को संबोधित कर सकते हैं।

कहां-कहां योगी ने किया प्रचार

मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी ने गुजरात, हिमाचल और त्रिपुरा में भाजपा के पक्ष में प्रचार में हिस्सा लिया। गुजरात में योगी ने काफी दौरा किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बाद योगी आदित्यनाथ ही स्टार प्रचारक थे। त्रिपुरा में भाजपा को फहराने में उनकी काफी बड़ी भूमिका मानी जा रही है। इसी तरह से कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें स्टार प्रचारक के रूप में मैदान में उतारा है। माना जा रहा है कि कर्नाटक में योगी के प्रचार के बाद भाजपा वोटों के ध्रुवीकरण के एजेंडे को नया आकार देने में सफल हो सकती है। इससे कांग्रेस की उम्मीदों को कुछ झटका लगने की भी उम्मीद है।

क्यों है योगी की मांग

योगी आदित्यनाथ नाथ संप्रदाय से हैं। भगवाधारी हैं और हिन्दुत्व के प्रतीक के रूप में उन्हें भाजपा में देखा जा रहा है। कर्नाटक में तटीय कर्नाटक का क्षेत्र काफी संवेदनशील है। अल्पसंख्य भी बड़ी मात्रा में हैं। कर्नाटक का यही वह क्षेत्र है, जहां पिछले दो-तीन सालों में दो दर्जन के करीब भाजपा के कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है और उन पर जानलेवा हमले हुए हैं। हुबली में ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर ईज ऑफ डूइंग मर्डर का आरोप लगाया था। माना जा रहा है कि यहां से राजनीति का सांप्रदायिक रंग वोटों के ध्रुवीकरण में सहायक हो सकता है। ऐसा हुआ तो पूरे कर्नाटक में चुनाव का गणित अपना असर दिखा सकता है। वैसे भी इस इलाके में लिंगायतों का ठीक-ठाक प्रभाव भी है।  दक्षिणी कन्नड़ तो भाजपा के गढ़ के रूप में गिना जाता है। वैसे भी कर्नाटक हर मठ-मंदिरों का राज्य है। योगी आदित्यनाथ इसके लिए काफी उपयुक्त समझे जा रहे हैं।



प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बाद यदि भाजपा में प्रचार के लिए किसी की सबसे अधिक मांग है तो वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। योगी आदित्यनाथ भाजपा के लगातार स्टार प्रचारक बने हुए हैं और राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद से प्रचार के लिए उनकी मांग बराबर बनी है। तटीय कर्नाटक में भी आदित्यनाथ की काफी मांग है। वह हुबली, उडुपी समेत दक्षिण कन्नड. तथा उत्तरी कन्नड़ में राजनीति का समीकरण बदल सकते हैं।


भाजपा के कर्नाटक चुनाव प्रचार में व्यस्त केन्द्रीय मंत्री का कहना है कि राज्य में वह न केवल जनसभा को संबोधित करेंगे, बल्कि रोड शो समेत अन्य प्रचार में भी शामिल होंगे। माना यह जा रहा है कि योगी चुनाव प्रचार के आखिरी दिन 10 मई तक राज्य में पार्टी के पक्ष में राजनीतिक समीकरण बनाने के लिए दर्जन भर से अधिक जन सभाओं को संबोधित कर सकते हैं।

कहां-कहां योगी ने किया प्रचार

मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी ने गुजरात, हिमाचल और त्रिपुरा में भाजपा के पक्ष में प्रचार में हिस्सा लिया। गुजरात में योगी ने काफी दौरा किया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बाद योगी आदित्यनाथ ही स्टार प्रचारक थे। त्रिपुरा में भाजपा को फहराने में उनकी काफी बड़ी भूमिका मानी जा रही है। इसी तरह से कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उन्हें स्टार प्रचारक के रूप में मैदान में उतारा है। माना जा रहा है कि कर्नाटक में योगी के प्रचार के बाद भाजपा वोटों के ध्रुवीकरण के एजेंडे को नया आकार देने में सफल हो सकती है। इससे कांग्रेस की उम्मीदों को कुछ झटका लगने की भी उम्मीद है।

क्यों है योगी की मांग

योगी आदित्यनाथ नाथ संप्रदाय से हैं। भगवाधारी हैं और हिन्दुत्व के प्रतीक के रूप में उन्हें भाजपा में देखा जा रहा है। कर्नाटक में तटीय कर्नाटक का क्षेत्र काफी संवेदनशील है। अल्पसंख्य भी बड़ी मात्रा में हैं। कर्नाटक का यही वह क्षेत्र है, जहां पिछले दो-तीन सालों में दो दर्जन के करीब भाजपा के कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है और उन पर जानलेवा हमले हुए हैं। हुबली में ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर ईज ऑफ डूइंग मर्डर का आरोप लगाया था। माना जा रहा है कि यहां से राजनीति का सांप्रदायिक रंग वोटों के ध्रुवीकरण में सहायक हो सकता है। ऐसा हुआ तो पूरे कर्नाटक में चुनाव का गणित अपना असर दिखा सकता है। वैसे भी इस इलाके में लिंगायतों का ठीक-ठाक प्रभाव भी है।  दक्षिणी कन्नड़ तो भाजपा के गढ़ के रूप में गिना जाता है। वैसे भी कर्नाटक हर मठ-मंदिरों का राज्य है। योगी आदित्यनाथ इसके लिए काफी उपयुक्त समझे जा रहे हैं।





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Wednesday, May 2, 2018

BJP And Congress Face Tough Fight Between SC And ST Seats In Karnataka

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  • एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और देश भर में दलित आंदोलनों से भाजपा की मुश्किलें बढ़ी हैं।
  • 224 में से करीब 100 सीटों पर दलित और आदिवासी समुदाय के वोटर्स का असर।

बेंगलुरु.देश भर में पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट के एससी/एसटी एक्ट पर फैसले के बाद काफी विरोध-प्रदर्शन हुए। केंद्र सरकार ने इसे देखते हुए फैसले के विरोध में तुरंत सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका भी दाखिल की थी। इसकी एक बड़ी वजह कर्नाटक चुनाव भी था, क्योंकि राज्य में दलित और आदिवासी समुदाय के करीब 26% वोटर हैं। वहीं, राज्य से भाजपा के केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने भी कुछ दिन पहले कहा था कि संविधान में बदलाव होना चाहिए। इसका राज्य में काफी विरोध हुआ था।

100 सीटों पर प्रभाव
- कर्नाटक में विधानसभा की 224 में 36 सीटें एससी और 15 एसटी के लिए सुरक्षित हैं। राज्य में करीब 100 सीटों पर अच्छी खासी तादाद में दलित और आदिवासी समुदाय के वोटर हैं। राज्य की करीब 60 सीटों पर दलित समुदाय और 40 सीटों पर आदिवासी समुदाय के वोटर असर डालते हैं।

- 2014 के लोकसभा चुनाव में विधानसभा वार सीटों पर बढ़त के लिहाज से भाजपा 36 एससी सीटों में से 18 और कांग्रेस 16 सीटों पर आगे थी। वहीं, एसटी सीटों पर भाजपा 8 और कांग्रेस 7 सीटों पर आगे थी। अब भाजपा ने इन सीटों को बचाने के लिए पूरी ताकत लगा दी है। वहीं, कांग्रेस भी जमकर मेहनत कर रही है।

सीएम सिद्दारमैया ने तीन समुदायों को मिलाकर अहिंदा बनाया है

- अहिंदा कन्नड़ शब्दों अल्पसंख्यातरू (अल्पसंख्यक), हिंदुलिदावरु मट्टू (पिछड़ी जातियां) और दलितरु (दलितों) का शॉर्ट फॉर्म है। इस समुदाय के कर्नाटक में करीब 60% वोटर हैं। सीएम सिद्दारमैया ने इनके लिए कई योजनाएं चला रखी हैं। सिद्दारमैया भी ओबीसी हैं। वह खुद को भी अहिंदा बताते रहे हैं।

- कांग्रेस के सीएम सिद्दारमैया दलित और आदिवासियों के लिए कई योजानाएं लॉन्च कर चुके हैं। इनमें गरीबों के लिए मुफ्त में अनाज, छात्रों के लिए दूध और किसानों के लिए बिना ब्याज के कर्ज आदि शामिल हैं। चुनाव से पहले उन्होंने एससी और एसटी समुदाय के लिए 23 करोड़ रु. की कई योजनाएं भी शुरू की थीं।

2014 के आम चुनाव में विधानसभा सीटों पर पार्टियों की बढ़त
समुदायकांग्रेसभाजपाजेडीएसकुल
एससी16180236
एसटी07080015
जनरल5410613173
कुल7713215224

कर्नाटक में परिवारवाद: भाजपा, कांग्रेस और जेडीएस नेताओं के 52 सगे मैदान में

- कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, भाजपा और जेडीएस ने परिवारवाद की पूरी फौज चुनावी मैदान में उतार रखी है। राज्य में 12 मई को होने वाले वोटिंग के लिए 2,655 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें से 2436 पुरुष और 219 महिला हैं।

- राजनीतिक दलों के परिवारवाद को देखें तो कुल 52 सगे-संबंधी उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। कर्नाटक में जेडीएस को तो पिता-पुत्र की पार्टी के नाम से जाना ही जाता है। पर इस मामले में कांग्रेस और भाजपा भी ज्यादा पीछे नहीं है। दोनों पार्टियों ने चुनाव जीतने के फॉर्मूले पर अपने नेताओं के सगे-संबंधियों को खूब टिकट दिए हैं।

- जेडीएस नेता और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा के दोनों बेटे-बहू चुनाव मैदान में हैं। भाजपा और कांग्रेस के सीएम पद के उम्मीदवारों के बेटे भी चुनाव मैदान में किस्मत आजमा रहे हैं।

# प्रमुख बड़े नेताओं के ये करीबी मैदान में हैं

1) एचडी देवगौड़ा (पूर्व प्रधानमंत्री): जेडीएस चीफ
- बेटा एचडी रेवन्ना, एचडी कुमारस्वामी, बहू- भवानी रेवन्ना, अनिथा कुमारस्वामी

2) सिद्दारमैया: मुख्यमंत्री
- खुद 2 सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं, बेटे- यतींद्र भी मैदान में हैं।

3) बीएस येद्दियुरप्पा: भाजपा के सीएम उम्मीदवार
- इनके अलावा बड़ा बेटा राघवेंद्र चुनाव मैदान में हैं।

4) गृह मंत्री रामलिंगा रेड्‌डी
- बेटी सोमैया रेड्‌डी भी लड़ रहीं।

5) कानून मंत्री टीवी जयेंद्र
- बेटा संतोष जयचंद।

6) भाजपा नेता जनार्दन रेड्‌डी
- इनके दोनों भाई- सोमेश्वर, करुणाकरण रेड्‌डी मैदान में।

7) मल्लिकार्जुन खड़गे
- बेटा प्रियांक खड़गे कलबुर्गी से।

8) वीरप्पा मोइली
- बेटा हर्ष मोईली भी लड़ रहे हैं।

9) मार्ग्रेट अल्वा
- इनकी बेटी निवेदिता अल्वा कांग्रेस के टिकट पर हैं।



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Narendra Modi Rallies In Karnataka Assembly Election

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बेंगलुरू.कर्नाटक में मोदी गुरुवार को कलबुर्गी, बेल्लारी और बेंगलुरु में 3 रैलियां करेंगे। इस दौरान मोदी 47 सीटों को कवर करेंगे। उधर, स्थानीय नेताओं की मांग पर प्रधानमंत्री की रैलियों की संख्या बढ़ा दी है। पहले शेडयूल में उन्हें 15 जगह जनसभाओं को संबोधित करना था। अब 6 और रैलियां करेंगे। यानी मोदी अब कुल 21 रैलियां करेंगे। हालांकि, अभी भाजपा ने यह नहीं बताया है कि ये रैलियां कहां और कब होंगी। इन नेताओं का कहना है कि मोदी की 1 मई को हुई 3 रैलियों से माहौल बदला है। बता दें कि राज्य में 224 सीटों पर 12 मई को वोटिंग होगी और 16 मई को नतीजे आएंगे।

21 सभाओं में 215 सीटों को कवर करेंगे
- कर्नाटक में मोदी की पहले 15 रैलियां प्रस्तावित थीं। अब 6 और रैलियों में बदलाव किया गया है। मोदी के चुनाव प्रचार का अगला चरण 5 मई को शुरू होगा। इसमें मोदी टुमकुर, शिवमोगा (शिमोगा) और गड़ाग में सभाएं करेंगे। यहां वे 49 सीटों को कवर करेंगे।

- मोदी 7 मई को रायचूर, चित्रदुर्ग, कोलार और 8 मई को विजयवाड़ा और मैंगलुरु में रैली करेंगे। इन दो दिनों में वे 65 सीटों को कवर करेंगे।

- मोदी ने अपने चुनाव अभियान की शुरुआत 1 मई को थी। मोदी ने पहली सभा में चामाराजनगर, मैसूर और मांड्या की 22 सीटों को कवर किया था। इस तरह मोदी 21 सभाओं के जरिए 215 सीटों को कवर करेंगे।

मोदी ने साधा था राहुल गांधी के 15 मिनट की चुनौती पर निशाना
- नरेंद्र मोदी ने पहले चरण के चुनावी अभियान में कांग्रेस सीएम सिद्धारमैया और राहुल गांधी पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था- राहुल सिद्धारमैया सरकार की उपलब्धियों पर किभी भी भाषा में बिना पढ़े 15 मिनट बोलकर दिखाएं।

- मोदी के इस बयान के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई। जवाब में सिद्धारमैया ने कहा था- "येदियुरप्पा की पूर्व सरकार की उपलब्धियों पर प्रधानमंत्री कागज से पढ़कर ही 15 मिनट बोल दें।"

मोदी ने किसानों से भी किया संवाद
- मोदी ने बुधवार को पार्टी की किसान इकाई के कार्यकर्ताओं से भी ऐप के जरिए बात की। कर्नाटक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शिकायतों पर मोदी ने कर्नाटक सरकार को उदासीन बताया।



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No Prise Rise In Petrol And Diesel Due To Karnataka Election, No Official Statement From Ministry - तो क्या 12 मई के बाद बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम!

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No Prise Rise In Petrol And Diesel Due To Karnataka Election, No Official Statement From Ministry - तो क्या 12 मई के बाद बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम!- Amar Ujala Hindi News















































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Karnataka Election First Time In The Country Chunavana App To Be Use

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बेंगलुरु.कर्नाटक विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग इलेक्शन से जुड़ी अहम जानकारी मुहैया कराने के लिए खास मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करेगा। देश में अपनी तरह का यह पहला प्रयोग होगा। बुधवार को कर्नाटक रिमोट सेंसिंग एजेंसी ने चुनाव (इलेक्शन) ऐप लॉन्च किया। आयोग के मुताबिक, इससे राज्य के 5 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं को पोलिंग बूथ, उम्मीदवारों और मतदान से जुड़ी अहम जानकारी मिलेगी। बता दें कि कर्नाटक की 224 विधानसभा सीटों के लिए 12 मई को वोट डाले जाएंगे और नतीजे 15 तारीख को आएंगे।

ऐप पर मिलेगा सभी मतदान केंद्रों का नक्शा

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी संजीव कुमार ने चुनाव ऐप लॉन्च करते हुए कहा कि यह मतदाताओं के बीच जागरुकता बढ़ाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का बेहतर इस्तेमाल साबित होगा।

- चुनाव ऐप में कर्नाटक की सभी विधानसभा सीटों के अंतर्गत आने वाले 56 हजार 696 मतदान केंद्रों का नक्शा लोड किया गया है। इसके जरिए मतदाता अपना वोटर आईडी नंबर, मतदान केंद्र तक जाने का रास्ता और वहां लगी कतारों की जानकारी हासिल कर पाएंगे।

उम्मीदवारों की परफार्मेंस भी पता चलेगी

- इस ऐप के जरिए मतदाता अपने विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवार से जुड़ी अहम जानकारी जान सकते हैं। मसलन पिछले चुनावों में उम्मीदवारों की परफार्मेंस क्या थी और उन्हें कितने वोट मिले थे।

ऐप के साथ वेब पर भी मिलेगी जानकारी

- चुनाव ऐप के जैसे ही वेबसाइट kgis.ksrsac.in/election पर भी जानकारियां उपलब्ध रहेंगी। इसके लिए कर्नाटक एप्लीकेशन सेंटर ने व्यापक इंतजाम किए हैं। मतदाता चाहें तो साइट पर जाकर भी किसी विधानसभा क्षेत्र और उम्मीदवारों से जुड़ी जानकारियां हासिल कर सकते हैं।

मतगणना के वक्त भी अपडेट मिलेगा

- चुनाव आयोग ने वेब और ऐप को ऐसे डिजाइन कराया है कि मतगणना के वक्त भी लोगों को उम्मीदवारों को मिले वोटों के अपडेट मिलते रहेंगे। साथ ही ऐप में दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर बुक करने का ऑप्शन दिया गया है, ताकि वे मतदान केंद्र तक आसानी से पहुंच सकें।



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